नागपुर समाचार : राज्य में प्रचलित तासिका (घंटे के आधार पर) नियुक्ति प्रणाली को पूर्णतः समाप्त कर उसकी जगह “कार्यकारी सहायक प्रोफेसर” पदनाम लागू करने की मांग को लेकर प्राध्यापक पदभरती महासंघ ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील को ज्ञापन सौंपा है।
यह ज्ञापन नागपुर उच्च शिक्षा विभाग के सह-संचालक डॉ. संतोष चव्हाण के माध्यम से सौंपा गया। महासंघ के राज्य अध्यक्ष डॉ. प्रमोद लेंडे खैरगांवकर के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन में कुल 23 मांगें रखी गई हैं, जिनमें “कार्यकारी सहायक प्रोफेसर” पदनाम और प्रति माह 80 हजार रुपये वेतन की मांग प्रमुख है।
महासंघ ने बताया कि वर्ष 2023 के नागपुर शीतकालीन अधिवेशन के दौरान भी यह मुद्दा कई मंत्रियों और विधायकों के समक्ष उठाया गया था, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस चर्चा या निर्णय नहीं हुआ है। पिछले लगभग 30 वर्षों से तासिका प्राध्यापकों का एक पूरा वर्ग शोषण का सामना कर रहा है, जिससे उनका जीवन अत्यंत कठिन हो गया है।
महासंघ पिछले 15 वर्षों से ज्ञापन, धरना, मोर्चा, उपोषण और आंदोलन के माध्यम से सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करता रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
प्रमुख मांगें
- तासिका प्राध्यापक पदनाम के स्थान पर “कार्यकारी सहायक प्रोफेसर” नाम स्वीकृत किया जाए।
- प्रति माह 80,000 रुपये वेतन सीधे खाते में जमा किया जाए।
- सेवा अवधि 11 महीने निर्धारित की जाए।
- कार्यकारी सहायक प्रोफेसरों को पूर्णकालिक प्राध्यापकों के समान शासकीय लाभ दिए जाएं।
- नियुक्ति कम से कम 5 वर्षों के लिए हो तथा बार-बार साक्षात्कार न लिया जाए।
- सेवार्थ आईडी, सेवा पुस्तिका एवं वेतन पावती अनिवार्य रूप से दी जाए।
- पेंशन योजना लागू की जाए तथा OPS/NPS की व्यवस्था स्पष्ट की जाए।
- महिला प्राध्यापकों को मातृत्व अवकाश सहित सभी वैधानिक छुट्टियां और उनका वेतन दिया जाए।
- चिकित्सा सुविधा (मेडिक्लेम) लागू की जाए।
- कार्यकाल का अनुभव पूर्णकालिक नियुक्ति में मान्य किया जाए।
- राज्य में रिक्त प्राध्यापक पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए।
इसके अलावा महासंघ ने तासिका प्राध्यापकों की समस्याओं को देखते हुए कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी सरकार के समक्ष रखी हैं।
ज्ञापन सौंपते समय महासंघ के अध्यक्ष डॉ. प्रमोद लेंडे खैरगांवकर के साथ डॉ. सतीश चाफले, प्रा. मालविका क्षीरसागर, प्रा. मनीषा भोयर, डॉ. नितीन बनकर, डॉ. रोशन भगत, डॉ. लखन इंगळे, दीपक शंभरकर, डॉ. निलिमा शाहू सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक उपस्थित थे।
महासंघ ने मीडिया से अपील की है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित कर तासिका प्राध्यापकों के न्यायसंगत अधिकारों के लिए सहयोग करे




