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नागपुर : क्षति को लेकर प्रशासन के प्रस्ताव में हुई चुक, 814 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग

केंद्रीय टीम ने जायजा लेने के बाद पुनः प्रस्ताव भेजने को कहा 

नागपुर : अगस्त में अतिवृष्टि से हुई क्षति को लेकर मदद के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए नया प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं. टीम ने कहा है कि अतिवृष्टि में पिछली 100 वर्ष में सबसे विकराल स्थिति सामने आई. काफी हानि पहुंची है. केंद्र से मदद की मांग करते समय राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन सहायता निधि के नियमों का पालन करना होता है. टीम ने सड़क, सिंचाई एवं पशुधन को हुई क्षति को आंकड़ों के साथ भेजने के निर्देश दिए हैं. केंद्र की टीम ने 24 से 26 दिसंबर तक नागपुर विभाग के चार अतिवृष्टि प्रभावित जिलों का जायया लिया.

शनिवार को विभागीय आयुक्त डॉ. संजीव कुमार ने केंद्रीय मदद को लेकर टीम से चर्चा की. बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रमेश कुमार गंटा, केंद्रीय वित्त विभाग के संचालक आर. बी. कौल, केंद्रीय नियंत्रण विभाग के अधीक्षक अभियंता महेंद्र सहारे, केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आर.पी. सिंह, केंद्रीय सड़क विकास व महामार्ग विभाग के मुख्य अभियंता तुषार व्यास मौजूद थे. डॉ. संजीव कुमार की अगुवाई में जिलाधिकारी रवींद्र ठाकरे, मुख्य कार्यकारी अधिकारी योगेश कुंभेजकर ने जिले के हालात पर प्रकाश डाला.

814 करोड़ की मांग : विभागीय आयुक्त संजीव कुमार ने 814.88 करोड़ रु. की सहायता राशि की मांग की. आपदा प्रबंधन सहायता निधि की शर्तों के मुताबिक 191.61 करोड़ रु. की मांग की गई थी. प्रत्यक्ष पंचनामे एवं निरीक्षण में पाया गया कि ढांचागत प्रणाली, कृषि, घर, पशुधन को भी व्यापक क्षति पहुंची है. इसे देखते हुए 632.26 करोड़ की अतिरिक्त मांग की जा रही है.

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