नागपुर समाचार : मकर संक्रांति के नजदीक आते ही पतंगों का बाजार सजने लगा है, खासकर शहर के जुने शुक्रवारी और इतवारी में दिल्ली लुधियाना और जयपुर से पतंगों की आवक शुरू हो चुकी है. वहीं लखनऊ और न गुजरात जैसे शहरों से भी आवक का अभी इंतजार है ई-कॉमर्स वेबसाइट्स से लेकर स्थानीय बाजारों तक में हर तरह की डिवाइस और सामान्य पतंगें मिलने लगी है. अभी से ओ काट और पण लूटने लिए बच्चों का भाग शुरू हो चुकी इसके लिए कारीगर और उनके परिवार है पों को बचने के लिए पूरे साल कड़ी मेहनत करते हैं शहर में 300 से स्यादा परिवारों के लिए पतंग बनाना उनको रोजी रोटी का जरिया बन गया है।
लोकल सालाई कम, लुधियाना और जयपुर से आवक
विक्रेता सौरभ चौधरी ने बताया कि बढ़ती महंगाई के साथ कच्चे माल को बड़ी हुई कीमत बिक्री पर असर डाल रही है. इसके कमाई के कारण पतंग बनाने वाले अब सोच रहे हैं कि क्या उन्हें यह बिजनेस जारी रखना चाहिए इस समय लोकल सप्लाई कम हो रही है. इससे भी पतंग के रेट में 40 प्रतिशत तक महंगाई का सामना और जयपुर से सप्लाई शुरू हो चुकी है. गुजरात और अन्य जगहों से विभिन्न आकारों और डिजाइन की पतंगो का इंतजार है।
हाथ से बने डोर-मांजा की डिमांड ज्यादा
सिद्धिकी साहू ने जताया कि जब पहा उड़ाने की बात आती है तो पतंग की डोर और भांजे भी बहुत जरूरी होता है. अभी डोर मांजा रायबरेली से ही आ रहा है शाहू ने बताया कि प्लास्टिक की पतंग के बारे में मनया ने कि के निर्देश जारी नहीं किया एनडीएम उन्हें बेचने से मना कर रहे हैं जिससे अधिकांश व्यापारों ने बेचकर दिया है मार्केट में 12 व्यापारियों की मानें तो मार्केट में ग्राहकी शुरू हो चुकी है. 25 दिसंबर से स्कूलों को क्रिसमस की छुट्टी तुम जाने के बाद मांग में तेजी आने की संभावना है।
एक नजर पतंग और गांजे के दामों पर
- 3 ताव का पतंग 200 रुपए से शुरू
- 2 ताव 60 से 70 रुपए
- 1 ताव 40 रुपए से शुरू
- उससे कम 10 रुपए से शुरू
- 9 तार मांजा 250 से 300 रुपया रील
- 12 तार मांजा 400 रुपया रील
- मयूर कॉटन मांजा 800 रुपए रील




