नागपुर समाचार : शहर में अवैध शराब की बिक्री, ढाबों पर शराब पीने की बढ़ती प्रवृत्ति और परमिट रूम मालिकों पर हो रहे प्राणघातक हमलों के विरोध में व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त से मुलाकात की। ‘नागपुर डिस्ट्रिक्ट परमिट रूम एसोसिएशन’ ने विस्तृत ज्ञापन सौंपकर शहर की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई और आरोपियों पर ‘मकोका’ लगाने की मांग की।
एसोसिएशन का कहना है कि शहर के सावजी भोजनालय, फार्म हाउस, कैफे, फिश कॉर्नर और चाइनीज ठेलों पर अवैध रूप से शराब पीने की अनुमति दी जा रही है। वैध परमिट रूम धारक हर साल ११.५० लाख रुपये लाइसेंस फीस और भारी टैक्स (जीएसटी, वैट, टीसीएस) सरकार को चुकाते हैं। अवैध ठिकानों का बोलबाला रोड, आउटर रिंग रोड, अमरावती रोड और वर्धा भंडारा रोड पर स्थित ढाबों और होटलों में अवैध शराब परोसी जा रही है, जिससे लाइसेंस धारकों का व्यापार ठप हो रहा है और सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। नियमों के अनुसार बियर शॉपी से केवल सीलबंद बोतल बेची जा सकती है, लेकिन कई जगह ग्राहकों को वहीं बैठकर पीने की अनुमति दी जा रही है।
७ दिन में कार्रवाई करे, नहीं तो उग्र आंदोलन
मानेवाड़ा चौक के ‘एसके बार’ पर हुए हिंसक हमले और शहर में बढ़ती अवैध शराब की बिक्री के विरोध में नागपुर जिला रेस्टोरेंट परमिट रूम एसोसिएशन ने हुंकार भरी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव जायसवाल ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर आरोपियों पर कठोर कार्रवाई और अवैध धंधे बंद नहीं हुए, तो व्यापारी सड़को पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। जायसवाल ने कहा कि बिना लाइसेंस के चल रहे ढाबों और होटलों में सरेआम अवैध शराब बेची जा रही है, जिससे कानून का पालन करने वाले व्यापारियों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। पिछले एक-दो साल से बार और रेस्टोरेंट पर हमले की घटनाएं बढ़ी है। लेकिन प्रशासन इन पर नियंत्रण पाने में विफल रहा है।
जिलाधिकारी और जॉइंट कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन
एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी और जॉइंट पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में १५ अप्रैल को हुड़केश्वर थाना क्षेत्र के ‘एसके बार’ पर हुए हमले का विशेष उल्लेख किया गया है। १५ से २० बदमाशों की टोली ने बार में घुसकर मालिक और मैनेजर पर जानलेवा हमला किया, तोडफोड की और नकदी लूट ली। घायल मैनेजर अभी भी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि घटना के समय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने खून से सने कपड़े पहने आरोपियों को भागने की इजाजत दी।




