नागपूर समाचार : पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि कृषि से जुड़े प्रत्येक विभाग प्रमुख को अपने क्षेत्र के किसानों के खेत पर जाकर उनकी समस्याएं समझनी चाहिए. यदि सरकार की योजनाओं की जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचाई जाए तो उनके मन में खेती के प्रति नया आत्मविश्वास पैदा होगा. प्रत्येक कृषि सहायक को महीने में कम से कम 15 किसानों से और जिला परिषद व कृषि विभाग के तहसील कृषि की अधिकारियों को महीने में कम से कम 10 किसानों से खेत पर जाकर मिलना चाहिए.
राजस्व विभाग के तहसीलदार और उपविभागीय अधिकारियों को भी इसमें सहयोग करना चाहिए. वे नियोजन भवन में खरीफ सीजन पूर्व समीक्षा बैठक में बोल रहे थे. बैठक में कृषि राज्य मंत्री आशीष जायसवाल, सांसद माया इवनाते, सांसद श्यामकुमार बर्वे, विधायक चरण सिंह ठाकुर, वसंतराव नाईक कृषि स्वावलंबन मिशन के अध्यक्ष नीलेश हेलोंडे पाटिल, जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनायक महामुनि सहित कई वरिष्ठ महामुनि अधिकारी उपस्थित थे.
खादों की कमी नहीं
किसानों को उनकी मांग के अनुसार ही रासायनिक खाद उपलब्ध कराने पालक मंत्री ने दिया है. किसी भी प्रकार जबरदस्ती या लिंकिंग पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है. जिले के लिए 1,74,700 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है जिसमें से 89,776 मीट्रिक टन उपलब्ध है और बाकी की आपूर्ति जारी है. किसानों को खाद की उपलब्धता की जानकारी देने के लिए एक मोबाइल एप भी लॉन्च किया गया जिसका क्यूआर कोड जारी किया गया. इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया.
सोयाबीन का रकबा घटा
जिले में कपास, सोयाबीन, तुअर और धान प्रमुख फसलें हैं. इस वर्ष कपास की बुआई का टारगेट 2,24,580 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है. सोयाबीन का रकबा घटने के कारण लगभग 75,800 हेक्टेयर में बुआई का नियोजन है.
फसल कर्ज पर सख्ती
यदि बैंक समय पर फसल कर्ज नहीं देते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर सीधे आपराधिक मामले दर्ज करने के निर्देश पालक मंत्री ने दिए गए हैं. खरीफ सीजन के लिए करीब 1,900 करोड़ रुपये का टारगेट तय किया गया है जिससे जिले के लगभग 1,72,900 किसानों को लाभ मिलेगा. जल का सावधानीपूर्वक उपयोग करने और सिंचाई का नियोजन करने के निर्देश दिए गए हैं. जिले के 77 बड़े और मध्यम जल प्रकल्पों में 946 दलघमी जल भंडारण उपलब्ध है. खरीफ के लिए 93,500 हेक्टेयर क्षेत्र का नियोजन किया गया है. उन्होंने बताया कि पड़ित जमीन पर महिला बचत गटों के माध्यम से चारा उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई गई है.




