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नागपुर : ‘नशा मुक्ति’ अभियान को अमल में लाने के लिए स्वयंसेवक प्रयत्न करें: जिलाधिकारी

नागपुर : नशामुक्त भारत अभियान केंद्र सरकार ने पूरे ज़ोर शोर से अमल में लाने का फैसला किया है. इसके लिए देश के 272 जिले चुने गए हैं. इसमें नागपुर के साथ साथ मुंबई, पूणे, नाशिक का समावेश है. जिलों में शहरों के साथ साथ, तालुका और ग्रामीण भागों में नशामुक्ति के लिए प्रयत्न किया जा रहा है. नशामुक्त भारत अभियान में प्रशिक्षित सेवकों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है. जब तक कोई अवधारणा को समाज स्वीकार नहीं करती है तब तक वह सफल नहीं हो पाती है. अतः इस मुहीम में पूरे ज़ोरों से काम करना अत्यंत आवश्यक है, यह बात जिलाधिकारी रवींद्र ठाकरे ने मुहीम के उदघाटन के दौरान हुए कार्यक्रम में उपस्थित मान्यवरों को संबोधित करते हुए कहा.

केंद्र सरकार के समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की पहल से नशामुक्त भारत अभियान की शुरुआत की गई है. इसके तहत आयोजित कार्यशाला के उदघाटन के दौरान जिलाधिकारी ठाकरे बोल रहे थे. बार्टी के महासंचालक धम्मज्योती गजभिये, सामाजिक न्याय विभाग के प्रादेशिक उपायुक्त सिध्दार्थ गायकवाड, बार्टी के संचालक दिवाकर गमे, एनआयएसडी के राज्य समन्वयक प्रज्ञा खोब्रागडे, सहायक आयुक्त सामाज कल्याण बाबासाहेब देशमुख व संचालक प्रा. डॉ. विनोद गजघाटे इस दौरान उपस्थित थे. मान्यवरों के हाथों दीप प्रज्वलित किया गया और कार्यक्रम का उदघाटन किया गया.

नशी की आदत व्यक्ति के मस्तिष्क पर विपरीत असर करती है. जीवन में कई अड़चनें आती जाती रहती हैं, लेकिन हमें उनपर विजय प्राप्त करना है. ऐसा न करने पर कई व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं का निर्माण हो सकता है. नशे की आदत डालने के बजाय चुनौतियों का खुलकर सामना करें. आज नशे की समस्या भारत में बढ़ रही है. इसके अलावा नागपुर मानों गले के कँसर की राजधानी बन गई है.

इन सब बातों का विचार करते हुए नशामुक्त अभियान ज़ोर शोर से प्रारम्भ करने का कार्य अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, यह जिलाधीकारी ने कहा. नशा शरिर को खोकला कर देता है. सामाजिक जीवन को भी नष्ट कर देता है. अतः कार्यशाला में उपस्थित स्वयंसेवक डॉक्टरों की तरह काम करें. पीड़ितों की सहायता और समुपदेशन करें. खुद समर्थ बनें और दूसरों को भी समर्थ और सशक्त बनाएं, उन्होंने कहा.

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