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नागपूर समाचार : पश्चिम बंगाल में ‘दीदी’ के ‘थर्ड डिग्री’ शासन का अंत, विपक्ष को महाराष्ट्र से सीख लेने की जरूरत – चंद्रशेखर बावनकुळे

नागपुर समाचार : महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों और राज्य की राजनीतिक स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बंगाल में भाजपा की सक्रियता और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के पतन को ‘सुशासन’ की जीत बताया है।

बंगाल में ‘दुष्ट शासन’ का अंत और सुशासन की शुरुआत

महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुळे ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वहां वर्षों से चल रहे संघर्ष और बलिदान की जीत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के कार्यकाल में भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्याएं की गईं, लेकिन संघ परिवार, भाजपा के बूथ प्रबंधन और वरिष्ठ नेताओं के अथक परिश्रम ने आखिरकार रंग दिखाया।

बावनकुळे के अनुसार, बंगाल की जनता ममता बनर्जी की ‘थर्ड डिग्री’ राजनीति और हिंसा से तंग आ चुकी थी और वहां के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प पर भरोसा जताते हुए विकास को वोट दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब बंगाल में ‘दुष्ट शासन’ का अंत होकर ‘सुशासन’ का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

विपक्ष पर निशाना और महाराष्ट्र की स्थिति

महाराष्ट्र की राजनीति का जिक्र करते हुए बावनकुळे ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट (यूबीटी) पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें बंगाल के नतीजों से सबक लेना चाहिए। उन्होंने तंज कसा कि देश और प्रदेश की जनता पूरी तरह विकास के साथ है, लेकिन विपक्ष सुधरने को तैयार नहीं है।

बावनकुळे ने भविष्यवाणी की कि महाराष्ट्र की जनता जिस तरह मोदी जी के साथ खड़ी है, उसे देखते हुए विपक्षी नेताओं को 2047 तक घर बैठना पड़ेगा। वहीं नसरापुर की घटना पर बोलते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरोपी को कड़ी सजा दिलाने का वचन दिया है और सरकार पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

लोकतंत्र और विपक्ष का दोहरा मापदंड

इसी कड़ी में नवनाथ बन ने विपक्षी नेताओं, खासकर संजय राउत की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके दोहरे मापदंडों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष की यह पुरानी आदत है कि जब वे जीतते हैं तो उसे ‘लोकतंत्र की जीत’ बताते हैं, लेकिन भाजपा की जीत पर ‘लोकतंत्र को खतरे’ में बताने लगते हैं। बन ने स्पष्ट किया कि बंगाल में जनता ने ममता सरकार के 15 वर्षों के अत्याचार, गुंडागर्दी और पापों का हिसाब चुकता किया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह बंगाल ने हिंसा को नकारा है, उसी तरह महाराष्ट्र की जनता ने भी महायुति का समर्थन कर उद्धव ठाकरे के शासन को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है।