संतों की आध्यात्मिकता से ही देश की संस्कृति सुरक्षित
नागपुर समाचार : ग्रीस, मिस्त्र और रोम जैसी प्राचीन सभ्यताएं समय के साथ समाप्त हो गईं, लेकिन भारत की संस्कृति आज भी जीवित है। यह केवल हमारी आध्यात्मिक परंपरा के कारण संभव हुआ है। हमारे पूर्वजों के पास वह ज्ञान था, जो दुनिया के पास नहीं था। यही कारण है कि जब-जब विश्व पर संकट आता है, तब-तब भारत ही मार्गदर्शन करता है।
यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने व्यक्त किए। वे अतिशय क्षेत्र श्री आदिश्वर धाम, बाजारगांव में आयोजित पंचकल्याणक महामहोत्सव के अंतर्गत तुलसीनगर में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने जैन मुनि आचार्य समयसागरजी से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया और विभिन्न आध्यात्मिक व सामाजिक विषयों पर चर्चा की।
भागवत ने कहा कि इतिहास में कई समाज विभिन्न संकटों में नष्ट हो गए, लेकिन भारत अपनी आध्यात्मिकता और ज्ञान के कारण आज भी कायम है। इसका श्रेय हमारे संतों और महात्माओं को जाता है। उन्होंने कहा कि संतों का सानिध्य जीवन में सुख और स्थिरता देता है, इसलिए हमें उनके मार्गदर्शन में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने आधुनिक भौतिकवाद और उपभोक्तावाद को समाज के लिए चुनौती बताते हुए कहा कि इन प्रवृत्तियों ने कई संस्कृतियों को कमजोर किया है। लेकिन भारत संतों और ऋषियों के मार्गदर्शन के कारण इन प्रभावों से बचा रहा है। यही आध्यात्मिक शक्ति हमें मजबूती देती है।
कार्यक्रम में नागपुर महानगर संघचालक राजेश लोया, कार्यवाह रवींद्र बोकारे, अरविंद आवड़े, जयपाल ढींगरा, महेश झा उपस्थित थे।




