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नागपूर समाचार : विश्वशांति के लिए की महाशांतिधारा मुनियों का आहार सामग्री से नहीं, श्रद्धा भक्ति से होता हैं

नागपुर समाचार : भगवान महावीर के जन्म कल्याणक महोत्सव के पूर्व तीन दिवसीय कार्यक्रम में इतवारी शहीद चौक स्थित श्री पार्श्वप्रभु दिगंबर जैन सैतवाल मंदिर में विश्व शांति के लिए महाशांतिधारा की गई। विश्व में युद्धजन्य परिस्थिति, ईंधन की किल्लत आदि परिस्थिति को देखते हुए विश्व में शांति बनी रहे इसलिए जैन आचार्य सुवीरसागर गुरुदेव के सानिध्य में भगवान महावीर की महाशांतिधारा की गई। महाशांतिधारा करने का सौभाग्य अनंतकुमार शिवनकर, संतोष, नितिन नखाते, शरद मचाले को प्राप्त हुआ।

प्रथम अभिषेक सुधीर सिनगारे ने किया, शर्करा अभिषेक विनोद गिल्लरकर, रसाभिषेक राजेश जैन, घृताभिषेक अजीत श्रावणे, दुग्धाभिषेक नितिन नखाते, दही अभिषेक जितेंद्र गडेकर, सर्वोषधि अभिषेक दिलीप राखे, चतुर्थ कलश दिलीप सावलकर, सुबोध कासलीवाल, आशीष अठ्ठकर, चंदन संजय मोदी, पूर्ण कलश प्रमोद राखे, अर्चना फल राजकुमार सवाने आदि ने किया। सभी ने विश्व शांति के लिए प्रार्थना की।

आचार्य सुवीरसागर गुरुदेव ने उदबोधन में कहा जहां संतों का आगमन होता हैं वह जगह धन्य हैं, वहां के श्रावक भी धन्य हैं, श्रावक पुण्यशाली जीव हैं। नागपुरवासियों को निरंतर संतों का समागम मिलता हैं। एक समय ऐसा था दिगंबर संत धरती पर देखने को नहीं मिलते थे। मुगलों के काल में साधु संतों पर उपसर्ग किया गया। पंचम काल में इस धरती पर संतों का अभाव नहीं रहेगा। उस समय दिगंबर मुद्रा के दर्शन दुर्लभ थे। मुनियों का आहार सामग्री से नहीं, श्रद्धा भक्ति से होता हैं। कितने बड़े भी बन जाओ, अपने समाज, धर्म को नहीं भूलना। साधु संतों के भक्ति में कभी कमी नहीं रखना।