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नागपूर समाचार : जल संवर्धन को बनाएंगे जन आंदोलन, ‘नागपुर जल संवाद’ राष्ट्रीय सम्मेलन में गडकरी ने जताया संकल्प

नागपुर समाचार : केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि विदर्भ में किसानों को समृद्ध करने के लिए पानी बचाने और जल स्तर बढ़ाने की नितांत जरूरत है। इसके लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है जिसके पास जो ऑप्शन है वह उस पर कार्य करे। विदर्भमें पानी की बड़ी समस्या है। जब तक इरिगेशन नहीं बढ़ाएंगे, उत्पादन नहीं बढ़ेगा और किसानों के पास पैसा नहीं आएगा। एक तरफ बाढ़ और दूसरी ओर सूखा, यह विसंगति है। बहुस्तरीय समन्वित प्रयासों और जनसहभागिता के माध्यम से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाया जाना चाहिए, ताकि किसान समृद्ध हो सकें। वे पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था के रजत महोत्सव वर्ष के निमित्त वसंतराव देशपांडे सभागृह में आयोजित नागपुर जलसंवाद राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे।

इस परिषद का मुख्य विषय ‘किसान आत्महत्या-मुक्त विदर्भ के लिए जल संरक्षण का उपाय’ था। उन्होंने बताया कि २५ वर्ष पूर्व जब वे आदिलाबाद के एक गांव में आत्महत्या करने वाले किसान परिवार से लालकृष्ण आडवानी के साथ मिलने गए थे तब उस परिवार का दर्द सुनकर आंखें भर आई थीं। यह बात समझ में आई कि हम जिस समाज में रहते हैं, संवेदनशील बनकर रहें। हमारा उपयोग ही क्या है कि लोग आत्महत्या कर रहे हैं। तब कुछ लोग इकठ्ठा हुए और इस संस्था की शुरुआत हुई।

पोस्टर-बैनर लगाने की जरूरत नहीं

पड़ेगी उन्होंने कहा कि राजनीति में समाजकरण की जरूरत है। ऐसा जो कार्य करेगा उसे पोस्टर-बैनर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लोग अच्छे हैं, समझते हैं। मैंने अपने विधायकों सांसदों को कहा था शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि के क्षेत्र में काम करें। उन्होंने कहा कि पूर्ति सिंचन संस्था को जल संवर्धन के क्षेत्र में कार्य करते हुए आज २५ वर्ष पूर्ण हो गए हैं। अब हम इसे जन आंदोलन बनाएंगे।

इस अवसर पर राज्यमंत्री आशीष जायसवाल, पंकज भोयर, पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार, सुनील मेंढे, पद्मभूषण एवं पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी, पद्मश्री उमाशंकर पांडे, सेठपाल सिंह, इंडिया पॉन्ड मैन रामबीर तनवर, सेंटर फॉर वॉटर पीस के अध्यक्ष संजय कश्यप, असम के केके छत्रधारा तथा नगालैंड की स्वेडेविनो नात्सो सहित देशभर से आए प्रतिनिधि उपस्थित थे। गडकरी ने कहा कि नदियों का मीठा पानी समुद्र में जाता है जिसे भविष्य के लिए बचाना होगा।

सरकार ने इसलिए ही नदी जोड़ योजना बनाई गई है। वाटर ग्रिड बनाने की जरूरत है। एक बेसिन का पानी दूसरे में शिफ्ट करेंगे तो उपयोग होगा। जल संवर्धन के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। हर चीज के लिए सरकार की ओर देखेंगे तो संभव नहीं है। सरकार के पास भी पैसे की कमी है। कुछ जगहों पर सरकार की योजनाओं का फायदा होता है। लोगों को सरकार व भगवान पर ही भरोसा है। मैंने कहा, दोनों को साइड करो। अगर ये दोनों काम करते तो यह हालात ही पैदा नहीं होते। मेरा ९० फीसदी समय सामाजिक कार्यों में जाता है। अनेक प्रयोग करता हूं। कुछ असफल भी होते हैं। मैं आर्गेनिक खाद बनाता हूं, इथेनॉल बनाता हूं, शक्कर कारखाना है। आर्गेनिक उत्पादों की ४ दुकान खोली है। इसके पीछे पैसा कमाना उद्देश्य नहीं है। किसानों को डीजल मुक्त करना है। इलेट्रिक ट्रैक्टर व उपकरणों के उपयोग से किसानों के डेढ़ लाख रुपये बचेंगे। किसान द्वारा बिटुमीन तैयार करना, ईंधन तैयार करना, ये सब किसानों का समृद्धि का मार्ग बनेगा। इसके लिए पानी जरूरी है।

जनसहभागिता वाली योजना तैयार करें

गडकरी ने राज्य मंत्री जायसवाल से कहा कि जनसहभागिता वाली योजनाएं तैयार करें। काटोल नरखेड़ में ज्यादा काम करने की जरूरत है। तालाब डेम के गाद निकाल कर वाटर कैपसिटी बढ़ाएंगे तो जल स्तर बढ़ेगा। जल संवर्धन करना एक स्टेप है। स्मार्ट विलेज बनेंगे। किसान समृद्ध होंगे लेकिन मूल संबंध पानी से ही है। मुनगंटीवार, जायसवाल ने भी अपने विचार रखे। आमंत्रित विशेषज्ञों ने जल संवर्धन व किसानों के संदर्भ में मार्गदर्शन किया। सचिन कुलकर्णी ने प्रस्तावना रखी। सुधीर दिवे ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रफुलदत्त जामदार ने आभार प्रदर्शन और संचालन आसावरी गलांडे-देशपांडे ने किया।

विधायक चरण सिंह ठाकुर, उमेश यावलकर, अनिल सोले, पद्मश्री चैतराम पवार, डॉ. रवि गालकाटे, अरुण कुमार पांडेय, अनिल सांबरे, सुमंत पुणतांबेकर, मिलिंद जोशी, अरविंद कोकाटे, विजय घाटोले, संजय सराफ, विजय घुगे, भैय्या टाले, अमित गोमासे, संजय टेकाडे, अविनाश खलतकर, अजय गांडोले, बंडू गौरकर और बंडू आंबटकर भी उपस्थित थे।