नागपुर समाचार : लंबी रस्सकशी और विवाद के बाद रविवार को आख़िरकार विदर्भ साहित्त्य संघ के चुनाव संपन्न हो गए। चुनाव में गिरीश गांधी को निर्णय बढ़त मिल गई है। वहीं श्रीपाद जोशी, प्रदीप दाते सहित अन्य उम्मीदवारों को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। तीसरे राउंड में गाँधी को कुल 2661 वोट मिले, वहीं दूसरे नंबर पर प्रदीप दाते रहे, जिन्हे 1187 वोट ही मिल पाए। वहीँ जोशी को 556 मिले। बढ़त को देखते हुए गांधी की जीत निश्चित मानी जा रही है। वहीं चुनावी परिणाम से साहित्य क्षेत्र में खलबली मच गई है।
ज्ञात हो कि, बाईट कई दिनों से संघ के अध्यक्ष सहित कार्यकारिणी के लिए मतदान शुरू थे। संघ से जुए हुए लोगों द्वारा पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान किया। वी. सा. संघ ने 7,493 वोटरों को पोस्ट से बैलेट पेपर भेजे थे। इनमें से 2,007 बैलेट पेपर गलत पते की वजह से वापस आ गए। इनमें से 506 वोटरों ने अपनी पहचान वेरिफाई करने के बाद वोट दिया, आखिर तक 4,935 वोटरों ने अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल किया। इनमें से 1,529 बैलेट पेपर पोस्ट से, 505 वोटरों ने और 2,831 प्रतिनिधियों ने वोट डाले। 1,501 वोटरों ने अलग-अलग वजहों से वोट नहीं दिया।
रविवार को विदर्भ साहित्य संघ के कार्यालय में वोटों की गिनती हुई। चुनाव परिणाम में पहले चरण से गिरीश गांधी ने बढ़त बनाई रखी। आखिरी चरण की काउंटिंग में गिरीश गांधी 2661 वोट लेकर विजयी रहे। वहीं दूसरे नंबर पर प्रदीप दाते रहे, चुनाव में उन्हें 1187 वोट मिली। वहीं श्रीपाद जोशी 701 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। इसी के साथ रविंद्र शोभने और रंजन दर्व्हेकर को क्रमशः 205 और 114 वोट मिले।
नितिन गडकरी के खिलाफ लगे थे आरोप
स्वर्गीय मनोहर म्हैसलकर के समय में बहुत कम जगह में हो रहे इस चुनाव में कई लोग डटे हुए हैं। उम्मीदवारों की बढ़ी हुई संख्या ने चुनाव में कड़ा मुकाबला बना दिया है। उम्मीदवारों ने आपत्ति जताई थी कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और BJP इस चुनाव में अपने हिसाब से काम कर रहे हैं। इस पर गडकरी ने भी कहा था कि उनका इस चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, राजनीतिक दखलंदाजी के आरोप आखिर तक लगते रहे।
मतपत्र तस्करी का आरोप
चुनाव के दौरान वोटिंग के तरीके को लेकर भी हंगामा हुआ था। विदर्भ साहित्य संघ के इस चुनाव ने साहित्यिक हलके में बड़ी हलचल मचा दी थी। चुनाव का यह हंगामा शनिवार शाम 6 बजे खत्म हुआ। आज, रविवार को होने वाली वोटों की गिनती में यह साफ हो जाएगा कि विदर्भ के साहित्य प्रेमी वोटरों ने किसका साथ दिया है।




