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नागपुर समाचार : ‘महिलामय’ मनपा में लाचार रहेंगे पुरुष

४ साल प्रशासक राज के बाद और सवा साल भोगना पड़ेगा वनवास

नागपुर समाचार : लगभग ४ साल तक मनपा में प्रशासक राज के बाद चुनाव की घोषणा होने से कई ने राहत की सांस ली थी। खासकर पुरुष नगरसेवकों में खासा उत्साह था लेकिन चुनाव के बाद महापौर, उपमहापौर तथा स्थायी समिति सभापति पर पद महिला सदस्यों के चयन से पुरुष सदस्यों को और सवा साल वनवास भोगना पड़ेगा।

सवा साल बाद केवल उपमहापौर तथा स्थायी समिति सभापति पद पर ही पुरुष सदस्य का चेहरा दिखाई दे सकता है। महपौर पद तो पूरे ढाई साल तक महिला सदस्य के लिए ही आरक्षित रहेगा। उल्लेखनीय है कि महापौर पद पर भाजपा की मीना ठाकरे, उपमहापौर पद पर भाजपा की लीला हाथीबेड तथा स्थायी समिति सभापति पद पर भाजपा की ही शिवानी दाणी का चयन होना तय हो चुका है।

तीनों महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं का कब्जा होने से अब पुरुष सदस्य दबी जुबान में कह रहे हैं कि काश !सत्ता पक्ष नेता पद भी पार्टी बाल्या बोरकर की किसी महिला को नियुक्त कर एक ‘अनब्रेकेबल’ रिकार्ड बना लेती! अब तो मजाकिया लहजे में यह मांग भी उठ रही है कि सरकार मनपा आयुक्त पद पर भी किसी महिला अधिकारी को नियुक्त कर दे ताकि पुरुष सदस्य सवा वर्ष तक किसी तीर्थाटन पर जा सकें। नागपुर मनपा में पहली बार पुरुष सदस्य अगले सवा वर्ष तक महिला पदाधिकारियों की कृपा पर निर्भर रहकर लगभग लाचारी का जीवन जीएंगे। उन्हें अंदर से विचित्र ‘फील’ होगा लेकिन चुप रहना उनकी मजबूरी होगी।

भाजपा ने उपमहापौर पद के लिए पुरुष सदस्य एड. संजय बालपांडे को मौका दिया था लेकिन स्थायी समिति अध्यक्ष पद के लिए नाम तय होने के बाद अंतिम समय में शिवानी का नाम सामने किए जाने से बालपांडे हतोत्साहित हो गए और उन्होंने उपमहापौर पद को विनम्रता से ठुकरा दिया। अब सवा वर्ष बाद स्थायी समिति अध्यक्ष पद बदला जाएगा। तब कहीं जाकर पुरुष सदस्य की लाटरी लग सकती है। उसके लिए भी ‘एक अनार सौ बीमार’ वाली स्थिति रहेगी।

अधिकारी करेंगे परेशान

विगत ४ वर्षों से नागपुर मनपा पर अधिकारियों का राज है। ऐसे में नए पदाधिकारियों को कम से कम ६ माह अधिकारियों से पार पाने में परेशानी जरूर होगी। अधिकारियों से काम निकालना नए पदाधिकारियों के लिए टेढी खीर साबित होगा। ऐसे में पदाधिकारियों को हर बार मुख्यमंत्री के पास फरियाद लेकर जाना होगा। यही कारण है स्थायी समिति सभापति का शुरुआती कार्यकाल शिवानी के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगा। मनपा कार्यों का अनुभव नहीं होने के बावजूद वे इतने बड़े पद की जिम्मेदारी का निर्वहन कैसे करेंगी, इस ओर सभी की नजरें लगी रहेंगी।