नागपुर/कोराडी समाचार : राज्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण उच्च गुणवत्ता वाली कोयला खदानों के कारण बाहरी कोयले पर निर्भरता कम होगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के साथ बिजली दरों में कमी आएगी और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति संभव होगी। यह कहना है मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस का। छत्तीसगढ़ में महानिर्मिति की गारे पालमा सेक्टर-२ कोयला खदान से कोराड़ी विद्युत प्रकल्प तक आने वाले पहले कोयला रेल रैंक के आगमन अवसर पर वे बोल रहे थे। उन्होंने रेल रैक को हरी झंडी दिखाकर कोयला हैंडलिंग परियोजना का निरीक्षण किया और उपस्थितों का मार्गदर्शन किया।

इस अवसर पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, महानिर्मिति के अध्यक्ष राधाकृष्णन बी., निदेशक हरणे, कार्यकारी निदेशक वाघ, गारे पालमा कोयला खदान के मुख्य अभियंता पडोले, कोराडी प्रकल्प के मुख्य अभियंता राणे, कार्यकारी निदेशक सपाटे, गिरीश कुमार, एसईसीआर नागपुर के मंडल प्रबंधक गुप्ता, मध्य रेल के डीआरएम गर्ग सहित अन्य पदाधिकारी एवं अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि गारे पालमा खदान से उच्च गुणवत्ता का कोयला मिलने के कारण ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और बाहरी निर्भरता कम होगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ बिजली की दरों में कमी आएगी। राज्य में लोड शेडिंग समाप्त होगी और किसानों को दिन में बिजली आपूर्ति करना आसान होगा।
सीएम ने बताया कि महानिर्मिति को गारे पालमा कोयला खदान आवंटित की गई है, जो १,५८३,४८७ हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। इससे ७७ वर्षों तक उच्च गुणवत्ता का कोयला उपलब्ध होगा। यहां कुल ६५५.१५२ मिलियन टन कोयला उत्पादन का अनुमान है। मार्च २०२६ से उत्पादन शुरू हो चुका है और अब तक ८०,८९५.३१ मीट्रिक टन कोयले का उत्पादन किया जा चुका है। इस खदान से कोराडी, चंद्रपुर और परली विद्युत परियोजनाओं को दीर्घकालीन कोयला आपूर्ति की जाएगी। कोयले की गुणवत्ता पर नियंत्रण रहेगा और राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।




