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नागपूर समाचार : पद्मश्री कल्पना सरोज को भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर पुरस्कार

लक्ष्य निर्धारित करने से ही सफलता मिलती है : नितिन गडकरी

नागपुर समाचार : वनराई फाउंडेशन द्वारा भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर पुरस्कार सफल उद्यमी पद्मश्री कल्पना सरोज को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हाथों प्रदान किया गया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने की। वनराई फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. गिरीश गांधी, महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा के अध्यक्ष अजय पाटिल, नागपुर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. अनिल हिरेखान, अनंतराव घारड, समीर सराफ, किशोर धारिया सहित अन्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का प्रास्ताविक वनराई फाउंडेशन के अध्यक्ष गिरीश गांधी ने किया।

लक्ष्य निर्धारित करने से ही सफलता मिलती है : नितिन गडकरी

विचार व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हर किसी को यह तय करने की जरूरत है कि वे अपने जीवन के साथ क्या करना चाहते हैं। आज फर्स्ट क्लास पास करने के बाद हर कोई यह पता लगाकर जॉब करता है कि उन्हें किस फील्ड में अच्छी जॉब मिलेगी। लेकिन नौकरी करने से ज्यादा जरूरी है नियोक्ता होना। उद्यमी बनने के बारे में बहुत कम लोग सोचते हैं। लक्ष्य निर्धारित करने से ही सफलता मिलती है। कल्पना सरोज जैसे उद्यमी बनेंगे तो उद्योग आधा बढ़ जाएगा। इसलिए, उद्यमिता को विकसित किया जाना चाहिए, उद्यमिता किसी जाति, धर्म, संप्रदाय से संबंधित नहीं है।

हम तकनीक के आधार पर बहुत सी चीजें बना सकते हैं। इरादा किसानों की उपज से इथेनॉल का उत्पादन करके किसानों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने का है। मनपा ने अपशिष्ट जल शोधन से 300 करोड़ रुपये की कमाई की है। मिहान में करीब 56 हजार लोगों को रोजगार मिला है। इसलिए टेक्नोलॉजी का ज्ञान होना जरूरी है। उन्होंने कहा, “हमें उन लोगों के पीछे खड़े होने की जरूरत है जो वास्तव में अच्छा कर रहे हैं। नितिन गडकरी ने सत्कर्ममूर्ति पद्मश्री कल्पना सरोज को समाज में 100 शोषित और उत्पीड़ित युवा उद्यमी बनाने की सलाह दी। 

कार्यक्रम के अध्यक्ष रामदास आठवले ने भी कविता सुना कर अपने विचार व्यक्त किए

कार्यक्रम की सत्कार मूर्ति पद्मश्री कल्पना सरोज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे जीवन में डॉ. आम्बेडकर और भगवान गौतम बुद्ध की सोच बहुत बड़ी है। मुझे कई अवॉर्ड मिले हैं, लेकिन यह अवॉर्ड मेरे लिए अहम है। सत्कार मूर्ति ने अपने जीवन के कई अच्छे और बुरे दिनों की बातों से भी अवगत कराया।

कुशल मंच संचालक रेखा दंडिगे-घिया ने किया तथा आभार प्रकट महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा के अध्यक्ष अजय पाटिल ने किया।

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