नागपुर समाचार : चिकित्सा क्षेत्र में सेवा भाव के साथ-साथ जीवनभर सीखते रहने की प्रवृति बेहद आवश्यक है। तकनीक कितनी भी उन्नत हो जाए लेकिन करुणा, ईमानदारी और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण का कोई विकल्प नहीं है। यह बात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एम्स के द्वितीय दीक्षांत समारोह में कही। समारोह में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस, केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, एम्स के अध्यक्ष डॉ. अनंत पांढरे, कार्यकारी संचालक डॉ. प्रशांत जोशी उपस्थित थे। राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं बल्कि संवेदनशीलता के साथ मानवता की सेवा का माध्यम है।
एक डॉक्टर न सिर्फ बीमारी का इलाज करता है बल्कि मरीज के मन में आशा भी जगाता है। उन्होंने डॉक्टरों को कठिन परिस्थितियों में भी मरीजों और उनके परिजनों के प्रति संवेदनशील रहने की सलाह दी, साथ ही मरीजों और उनके परिजनों से भी स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक अनुसंधान के माध्यम से तेजी से बदलाव हो रहा है। इन तकनीकों का उपयोग ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं की खाई को कम करने के लिए किया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन, टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, जन औषधि केंद्र और ‘अमृत’ फार्मेसी जैसी पहल से आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।
मिले पुरस्कार, मेडल
दीक्षांत समारोह में कुल २१० विद्यार्थियों को डिग्रियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इनमें १२९ एमबीबीएस, २९ एमडी/एमएस, ३५ बीएससी (ऑनर्स) नर्सिंग, ५ एमएससी और १२ अन्य स्वास्थ्य शाखाओं के छात्र शामिल रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न पाठ्यक्रमों में अव्वल रहे ८ छात्रों को प्रतीकात्मक रूप से डिग्री प्रदान की। साथ ही मेधावी विद्यार्थियों को पदक भी दिये गये। इनमें डॉ. वेदावती बडयोपाध्याय, डॉ. सुंकारी श्रीहरी बाबू, डॉ. प्रियांका, डॉ. संजय पैठणकर, डॉ. वैदेही जे. लोया, निकिता जोशी, तौसीफ अहमद लस्कर और अरसला परवीन का समावेश रहा।
५ किमी के दायरे में सुविधाएं देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में पिछले कुछ वर्षों में १५ से अधिक नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि हर नागरिक को उसके घर से ५ किलोमीटर के दायरे में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक बनाया जा रहा है और संक्रामक रोगों से निपटने के लिए व्यापक योजना बनाई जा रही है। छात्रों से उन्होंने अपील की कि वे ज्ञान के साथ करुणा का भी समावेश करें। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि आज के समय में आयुष पद्धतियों को आधुनिक चिकित्सा के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सभी एम्स में आयुष विभाग स्थापित किए जा चुके हैं।








