नागपुर समाचार : महानगरपालिका के परिवहन विभाग का वर्ष २०२५-२६ का संशोधित और २०२६-२७ का प्रस्तावित बजट परिवहन प्रबंधक मेघना वासनकर ने सोमवार को परिवहन समिति की बैठक में सभापति मंगला खेकरे को प्रस्तुत किया। १५० करोड़ रुपए के घाटे की चुनौती वाले इस बजट में शहर की सार्वजनिक परिवहन सेवा को अधिक सक्षम, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। संशोधित अनुमान के अनुसार २०२५-२६ में कुल आय ४१८.४० करोड़ रुपए और खर्च ४१७.९० करोड़ रुपए रहने की संभावना है, वहीं २०२६-२७ के लिए ५२४.५८ करोड़ रुपए की आय और ५२४.०९ करोड़ रुपए के स्वर्च का अनुमान है।
परिवहन समिति की बैठक डॉ. पंजाबराव देशमुख स्थायी समिति के सभागृह में आयोजित की गई। अध्यक्षता सभापति मंगला खेकरे ने की। परिवहन समिति के सदस्य सुधीर राऊत, पूजा पाठक, शैलेष पांडे, दिनेश यादव, शकील पटेल, अर्चना पडोले, विजय होले, मंगला मस्के और रूपाली ठाकुर उपस्थित थे।
केंद्र सरकार की योजना के तहत १५० ई-मिडी बसों को मंजूरी मिली है और उनमें से ५० का संचालन शुरु हो चुका है। इन बसों लिए केंद्र और राज्य सरकार प्रति किलोमीटर संचालन लागत की भरपाई करेंगे. साथ ही २५ आर्टिकुलेटेड बसें शुरु करने की योजना है। बस स्टॉप और यात्री सुविधाओं के लिए निजी भागीदारी के माध्यम से २४४ बस शेल्टर बनाए गए हैं, जिससे आय भी प्राप्त हो रही है। १११ और बस शेल्टर बनाने की योजना है। परिवहन विभाग का कुल संचालन खर्च लगभग ३५० करोड़ रुपए अनुमानित है, जबकि आय केवल १९० करोड़ रुपए रहने की संभावना है, जिससे लगभग १५० करोड़ रुपए का घाटा अनुमानित है।
यह घाटा मनपा के अनुदान से पूरा किया जाएगा, फिर भी इसे कम करना विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। मंगला खेकरे, सभापति, परिवहन समिति, मनपा ने बताया परिवहन विभाग की आय बढ़ाने के लिए बिना टिकट यात्रा पर नियंत्रण और विज्ञापनों के माध्यम से राजस्व बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
शहर के बस बेड़े में में वर्तमान में ५८० बसें हैं, जिनमें ३८५ ई-बसें, १५० मिडी डीजल बसें और ४५ मिनी बसें शामिल हैं। प्रतिदिन लगभग १.६१ लाख यात्री बस सेवा का लाभ लेते हैं और ७०८८ फेरे संचालित होते हैं। पर्यावरण अनुकूल परिवहन के लिए ई-बसों की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार की सहायता से २५० वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए १३७ करोड़ रुपए का अनुदान मिला है, जिनमें से १०५ बसें प्राप्त हो चुकी हैं। रोष बसें जल्द ही मिलने की संभावना है। १५वें वित्त आयोग के फंड से १४४ मिडी बसें खरीदी गई है।




