

नागपुर समाचार : नायलॉन और सिंथेटिक मांजा के घातक परिणामों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने आदेश दिया कि अब से नायलॉन मांजा का उपयोग करने या इसे बेचने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति नायलॉन मांजा से पतंग उड़ाते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर २५,००० का जुमाना लगाया जाएगा। यदि उल्लंघन करने वाला नाबालिग है, तो यह राशि उसके माता-पिता से वसूली जाएगी।
कोर्ट का मानना है कि बच्चों को जिम्मेदार व्यवहार और आत्म नियंत्रण सिखाना माता-पिता का कर्तव्य है, ताकि वे अपने कार्यों के परिणामों को समझ सके। नायलॉन मांजा के व्यापार पर लगाम कसने के लिए कोर्ट ने विक्रेताओं पर २,५०,००० का जुर्माना निर्धारित किया है। यह दंड न केवल बेचने पर, बल्कि स्टॉक रखने पर भी लागू होगा। विशेष बात यह कि यह जुर्माना हर एक उल्लंघन के लिए अलग से देय होगा।
कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि इस जुर्माने से एकत्रित राशि को एक ‘पब्लिक वेलफेयर अकाउंट’ में जमा किया जाएगा। इस खाते का संचालन नागपुर के जिलाधिकारी, मनपा आयुक्त और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की एक समिति करेगी। इस राशि का उपयोग नायलॉन मांजा के शिकार हुए लोगों के उपचार के लिए किया जाएगा।
कोर्ट ने प्रशासन को डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने का निर्देश दिया। छापेमारी करने वाले अधिकारियों के पास भुगतान के लिए क्यूआर कोड उपलब्ध होगा। यदि कोई तुरंत जुर्माना नहीं भर पाता, तो उसे १५ दिनों का नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद इसे लैंड रेवेन्यू (भू-राजस्व) की तरह वसूला जाएगा, जिसमें सम्पत्ति से जुर्माना वसूली का प्रावधान है। हर जिले का
साइबर सेल नायलॉन मांजा की शिकायतें प्राप्त करने के लिए एक वाट्सएप ग्रुप बनाएगा। याचिकाकर्ता की ओर से अधि. एन. जाधव, सरकार की ओर से अधि. एस.एम. उके, मनपा की ओर से अधि. जैमीनी कासट, नगर परिषद की ओर से अधि, महेश धात्रक तथा एमपीसीबी की ओर से अधि. रवि सन्याल ने पैरवी की।
यदि किसी क्षेत्र में नायलॉन मांजा के कारण कोई अप्रिय घटना होती है, तो संबंधित क्षेत्र के पुलिस अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा कि उन्होंने अपनी ड्यूटी में लापरवाही क्यों बरती? कोर्ट ने पुलिस आयुक्तों और अधीक्षकों को आदेश दिया है कि वे १३ और १४ जनवरी को सभी प्रमुख समाचार पत्रों में इस जुर्माने के बारे में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करें। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि इस सूचना की अनभिज्ञता का बहाना जुर्माना भरने से बचने के लिए नहीं चलेगा।




