नागपूर समाचार : भारत का कानूनी एवं नियामक ढांचा अब तेज़ी से बदल रहा है। सुधारों का फोकस व्यापार सुगमता, त्वरित वाद निस्तारण, एमएसएमई संरक्षण और विलय-अधिग्रहण (M&A) के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है। इसी संदर्भ में “भारत का कानूनी परिदृश्य: व्यवसाय सशक्तिकरण, एमएसएमई पुनर्जीवन और जिम्मेदार पूंजी को प्रोत्साहन” कार्यक्रम से पहले आयोजित मीडिया संवाद में एयू कॉर्पोरेट एडवाइज़री एंड लीगल सर्विसेज़ के संस्थापक श्री अक्षत खेतान ने इन सुधारों की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि तेज़ और पारदर्शी कानूनी व्यवस्था अब व्यवसाय को गति देने का सबसे बड़ा साधन बन चुकी है।
“आज कानून अड़चन नहीं, बल्कि व्यवसाय का समर्थ साझेदार है। पारदर्शी, पूर्वानुमेय और बिजनेस-फ्रेंडली कानूनी व्यवस्था हमारा संकल्प है,” श्री खेतान ने जोर देते हुए कहा।
कॉर्पोरेट प्रशासन, डिजिटल अनुपालन और निवेश-अनुकूल नीतियाँ भारत को वैश्विक स्तर पर और प्रतिस्पर्धी बना रही हैं।
एमएसएमई: अर्थव्यवस्था की रीढ़ और सुधारों का केंद्र
मीडिया संवाद में बताया गया कि एमएसएमई को सुरक्षित, सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार ने कई निर्णायक कदम उठाए हैं—
• एमएसएमईडी अधिनियम के तहत भुगतान में देरी पर कड़ी कार्रवाई
• एमएसई फ़ेसिलिटेशन काउंसिल्स और ‘एमएसएमई समाधान’ द्वारा त्वरित विवाद समाधान
• IBC के PPIRP मॉडल से संकटग्रस्त एमएसएमई इकाइयों का सरल पुनर्जीवन
• विस्तार के लिए विलय एवं अधिग्रहण लेनदेन को सरल समर्थन
इन सुधारों का उद्देश्य एमएसएमई को लचीला, प्रतिस्पर्धी और निवेश-तैयार बनाना है।
IBC में सुधार: समाधान और पुनर्जीवन पर केंद्रित
इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) में किए गए सुधारों से समाधान प्रक्रिया पहले से कहीं तेज और भरोसेमंद हुई है।
मुख्य प्रभाव—
• संकटग्रस्त परिसंपत्तियों का तेज समाधान
• निवेशकों के लिए अधिक पारदर्शी व्यवस्था
• M&A-आधारित पुनर्जीवन की बढ़ती संभावनाएँ
• एमएसएमई के लिए कम व्यवधान वाला पुनर्गठन मॉडल
श्री खेतान ने कहा,
“IBC केवल लिक्विडेशन नहीं है, यह ईमानदार व्यवसायों को बचाने की प्रक्रिया है।”
अपराधीकरण में कमी और डिजिटल न्याय प्रणाली
सरकार ने छोटी तकनीकी चूकों पर जेल के प्रावधान कम करते हुए आर्थिक दंड को प्राथमिकता दी है। साथ ही, ई-कोर्ट्स फेज-III के अंतर्गत वर्चुअल सुनवाई, ई-फाइलिंग और ऑनलाइन केस सूचना से न्याय प्रणाली और अधिक तेज़, पारदर्शी और सुलभ बनी है।
निवेश-सक्षम भारत की दिशा में निर्णायक कदम समापन में श्री खेतान ने कहा
“कानून को वृद्धि का सहयोगी बनाना ही हमारा लक्ष्य है। एमएसएमई संरक्षण, IBC मजबूती, विलय-अधिग्रहण सुगमता और डिजिटल न्याय व्यवस्था—इन सभी सुधारों से भारत एक सुरक्षित, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।”
यह समग्र परिवर्तन भारत को वैश्विक बाजार में और अधिक सक्षम, आकर्षक और विश्वसनीय आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।




