माँ मेरी जगजननी, माँ मेरी भवानी।
ममता की गंगा बहे, आँखों में कहानी।।
नौ महीना पेट में, रखकर मुझे सँवारा।
दुख के हर तूफ़ान में, माँ ने मुझे उबारा।।
दुर्गा बन तलवार सी, संकट बीच अड़ी है।
काली बन अन्याय पर, बिजली जैसी गिरी है।।
लक्ष्मी बन घर-आँगना, खुशियों से भर देती।
अपने सारे दर्द को, हँसते-हँसते लेती।।
मैं जब घर से दूर हो, परदेशों में जाता।
माँ का कोमल हृदय तब, रो-रो मुझे बुलाता।।
खाना भी ना खा सके, चिंता में खो जाती।
“मेरा बेटा ठीक तो?” बस इतना दोहराती।।
दुनिया की हर सुंदरी, फीकी मुझको लगती।
माँ के चेहरे की चमक, चाँदनी बन जगती।।
चाहे रूप सरल रहे, चाहे तन हो काला।
माँ से सुंदर जगत में, ना देखा मतवाला।।
जब-जब जीवन हारकर, टूट गया बेचारा।
माँ ने अपने आँचल से, फिर साहस को सँवारा।।
धरती पर भगवान का, यदि कोई आकार है।
माँ के चरणों में ही, सारा यह संसार है।।
पिता मेरे महादेव, माँ मेरी भवानी।
दोनों के चरणों में, बसती मेरी कहानी।।




