नागपुर समाचार : डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा ‘श्री राम जन्मभूमि मंदिर’ निर्माण के मार्गदर्शकों एवं शिल्पकारों हेतु सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। रेशिमबाग स्थित इस कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण श्रीराम की इच्छा और समाज के सामूहिक पुरुषार्थ से संपन्न हुआ है, लेकिन अब हमें प्रत्येक मन की अयोध्या बनाकर राष्ट्र का भव्य मंदिर खड़ा करना है।
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भगवान की करांगुली का बल तब प्रवाहित होता है जब समाज अपनी ‘लकड़ी’ (योगदान) लगाता है। १८५७ से शुरू हुई उत्थान की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि २०१४ में दुनिया ने माना कि भारतीयों ने मानसिक गुलामी को विदा कर दिया हैं। आज जो लोग पहले ‘हिंदू राष्ट्र’ के नाम पर हंसते थे, वे भी स्वीकार कर रहे हैं कि यह हिंदुओं का देश है। उन्होंने कहा कि सूरज की तरह भारत का हिंदू राष्ट्र होना एक
शाश्वत सत्य है, जिसे घोषित करने की आवश्यकता नहीं। सरसंघचालक ने कार्यकर्ताओं को सचेत करते हुए कहा कि संघर्ष और विरोध में जोश रहता है, परंतु अनुकूलता के समय ‘सुखासीनता’ का खतरा बढ़ जाता है। राम राज्य केवल राजा से नहीं, बल्कि प्रजा के आचरण से आता है। हमें स्वयं, अपने परिवार और समाज में राम जैसा आचरण उतारना होगा। कार्यक्रम में गोविंददेव गिरी महाराज, स्मारक समिति के अध्यक्ष भैयाजी जोशी और उपाध्यक्ष श्रीधर गाडगे प्रमुखता से उपस्थित थे।
डॉ. भागवत ने मंदिर निर्माण से जुड़ी प्रतिभाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का उत्थान विश्व के कल्याण के लिए अनिवार्य है और यह कार्य भारत की संतानों को ही सिद्ध करना है। कार्यक्रम में भैयाजी जोशी ने कहा कि अयोध्या का मंदिर केवल पत्थरों का शिल्प नहीं, बल्कि हिंदू समाज के सम्मान और पुनः प्रतिष्ठा का प्रतीक है। जब तक अपमान का कलंक नहीं मिटता, तब तक राष्ट्र भाव प्रबल नहीं हो सकता, यह मंदिर उसी कलंक को मिटाने का माध्यम है। यह मंदिर केवल अयोध्या का नहीं है, इसमें ढाई लाख गांवों की मिट्टी और करोड़ों लोगों की भावनाओं का प्रकटीकरण है।
कार्यक्रम में स्वामी गोविंददेवगिरी ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण केवल पांच वर्षों की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक शताब्दी तक चले महान यज्ञ की पूर्णाहुति है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसी चट्टान के रूप में खड़े रहे, जिनकी इच्छाशक्ति और माइक्रो-मैनेजमेंट के बिना इस पड़ाव तक पहुँचना संभव नहीं था। मंदिर निर्माण कार्य का ‘पूर्ण विराम’ नहीं है, बल्कि यह एक ‘अल्प विराम’ है, अब हमारा अगला लक्ष्य राम राज्य लाना है। जैसे वनवास सहने के बाद ही राम ‘भगवान राम’ बने, वैसे ही प्रचारकों के स्वयं स्वीकृत वनवास और सेवा कार्य ने ही आज यह सुखद दिन दिखाया है।
इस दौरान कार्यक्रम में नृपेन्द्र मिश्र, जगदीश आफळे, गिरीश सहस्त्रभोजनी, जगन्नाथ गुळवे, आशिष सोमपुरा, निखिल सोमपुरा, अरुण योगिराज, जय काकतीकर, मनिष त्रिपाठी, सत्यनारायण पांडे के साथ बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।




