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नागपूर समाचार : कांग्रेस में गुटबाजी के बीच केतन ठाकरे ने नामांकन वापसी का लिया निर्णय

नागपुर समाचार : मनोनीत पार्षद को लेकर कांग्रेस में एक बार फिर आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आए हैं। उत्तर नागपुर के विधायक नितिन राऊत द्वारा शहर अध्यक्ष विकास ठाकरे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने के बाद विवाद गहराता दिख रहा है। इसी बीच महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव केतन ठाकरे ने नागपुर मनपा में मनोनीत पार्षद के रूप में दाखिल अपना आवेदन वापस लेने का निर्णय लिया है।

इस संबंध में केतन ठाकरे ने गुरुवार को मनपा के विपक्ष नेता संजय महाकालकर को पत्र लिखकर नामांकन वापस लेने का अनुरोध किया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा दी गई हर जिम्मेदारी को उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाया है और कार्यकर्ताओं के हित में चुनाव भी नहीं लड़ा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनके नामांकन से नितिन राऊत को आपत्ति है तो वे सम्मानपूर्वक अपना नाम वापस लेने को तैयार हैं। उन्होंने राऊत को पितातुल्य बताते हुए किसी प्रकार के विरोध से इनकार किया। केतन ठाकरे ने यह भी कहा कि वरिष्ठ नेताओं की ऐसी प्रतिक्रियाओं से कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी है, जबकि उनका उद्देश्य पार्टी अनुशासन और एकता बनाए रखना है।

प्रदेश कांग्रेस की तरफ से कोई नहीं था कोई आदेश – संजय महाकालकर 

विपक्ष नेता संजय महाकालकर ने कहा कि मनपा चुनाव में जिन उम्मीदवारों को टिकट दिया गया था, उन्हें मनोनीत सदस्य नहीं बनाने के निर्देश पार्टी से मिले थे. हालांकि, मनपा में मनोनीत सदस्यों के संबंध में प्रदेश कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक आदेश या पत्र प्राप्त नहीं हुआ था. एक दिन पहले ही मनपा सचिव द्वारा मनोनीत पार्षद के चयन प्रक्रिया का पत्र मिला था. उन्होंने बताया कि नितिन राऊत ने बंडोपंत टेंभुर्णे और सुरेश जग्यासी के नाम सुझाए थे, लेकिन दोपहर 3 बजे तक उनके बीच सहमति नहीं बन पाई. समय पर आवेदन भरना आवश्यक था, इसलिए पार्षदों की मांग के अनुसार केतन ठाकरे और विभिन्न सामाजिक संगठनों की मांग पर अतुल कोटेचा का नामांकन दाखिल किया गया. महाकालकर ने कहा कि 2017 के मनपा चुनाव के बाद प्रदेश कांग्रेस ने उन्हें विपक्ष नेता नियुक्त किया था. तब राऊत समर्थक तीन पार्षदों ने पार्टी का निर्णय माना नहीं था.

आंबेडकर भवन तोड़ा गया था, तब नितिन राऊत को आंबेडकरी जनता याद क्यों नहीं आई?

कांग्रेस पार्षद विवेक निकोसे ने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी ने कैबिनेट मंत्री और बड़े पद दिए, उनके द्वारा इस तरह की चर्चा कर पार्टी को संकट में डालना उचित नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब आंबेडकर भवन तोड़ा गया था, तब नितिन राऊत को आंबेडकरी जनता याद क्यों नहीं आई? उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2017 में कांग्रेस ने किशोर जिचकार को मनोनीत सदस्य बनाया था, तब आंबेडकरी जनता कहां थी? निकोसे ने यह भी आरोप लगाया कि जब संगठन निर्माण का कार्य चल रहा था, तब राऊत किसी कार्यक्रम में नजर नहीं आए. पिछले 12 वर्षों में उन्होंने देवड़िया कांग्रेस भवन की सीढ़ियां भी नहीं चढ़ीं. उत्तर नागपुर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को देवड़िया जाने से रोकते हैं. ऐसे में उनका पार्टी अनुशासन कहां गया।