

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघः ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ आयोजित
नागपुर समाचार : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक हित और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने वाला कोई प्रभावी मार्गदर्शक सिद्धांत आज दुनिया के पास उपलब्ध नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि संघर्ष और आत्मकेंद्रित विकास के मौजूदा वैश्विक मॉडलों का विकल्प तलाशने के लिए दुनिया भर में प्रयास जारी हैं और ऐसे में भारत के पास विश्व का नेतृत्व करने का एक बड़ा अवसर है। वे गुरुवार को नागपुर में आयोजित संघ के स्वयंसेवक प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में विख्यात उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
जरूरत भारतीय मूल्यों को फिर तलाशने की
मोहन भागवत ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न देशों के बीच चल रहे संघर्षों का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। जो देश युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, उन्हें भी इसके आर्थिक और सामाजिक परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं। भारत ने ऐतिहासिक काल में भी ज्ञान, विज्ञान और आर्थिक मोर्चे पर दुनिया का नेतृत्व किया है और आधुनिक ज्ञान की कई अवधारणाओं की जड़ें भारत में ही पाई जाती है। समय के साथ विस्मृत हो चुके इन भारतीय मूल्यों और क्षमताओं को फिर से तलाशने की आवश्यकता है। मानव विकास के अंतर्विरोधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया यह तो जानती है कि मानव शरीर, मन और बुद्धि का अलग-अलग विकास कैसे किया जाए, लेकिन इन तीनों का एक साथ और संतुलित विकास करने का कोई प्रभावी ढांचा अभी तक विकसित नहीं हो पाया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने देश के कोने कोने से आए ८८० से अधिक स्वयंसेवकों की उपस्थिति को ‘लघु भारत’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि संघ जिस तरह से जमीनी स्तर पर अनुशासन और देश प्रेम की भावना का निर्माण करता है, वह अद्वितीय है।
उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि देश की प्रगति केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव से मापी जाती है। जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति सशक्त नहीं होगा तब तक राष्ट्र निर्माण अधूरा है। उन्होंने देश के युवाओं से देश में ही नया उद्योग शुरू करने का आह्वान किया जिससे देश की अर्थव्यवस्था को सुधारा जा सके। समापन समारोह में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित शहर के हजारों गणमान्य नागरिक, विचारक और स्वयंसेवक उपस्थित थे।





