नागपुर समाचार : महाराष्ट्र की चार राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने आधिकारिक तौर पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए नागपुर की पूर्व महापौर मायाताई इवनाते को आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी के इस निर्णय से नागपुर सहित पूरे विदर्भ के राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अनुभवी, संगठनात्मक रूप से मजबूत और प्रशासनिक अनुभव रखने वाली नेता के रूप में उन पर विश्वास जताया गया है।
मायाताई इवनाते नागपुर की राजनीति में एक अध्ययनशील और संयमित नेता के रूप में जानी जाती हैं। स्थानीय स्वशासन संस्थाओं से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उन्होंने विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए व्यापक अनुभव अर्जित किया है। 15 जुलाई 2007 से 23 दिसंबर 2009 तक उन्होंने नागपुर महानगर पालिका की महापौर के रूप में कार्यभार संभाला। उनके कार्यकाल में शहर की बुनियादी सुविधाओं, सड़क विकास, जलापूर्ति व्यवस्था और स्वच्छता अभियानों को प्राथमिकता दी गई। प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को गति देना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही।
महापौर के रूप में उन्होंने नागपुर के शहरी विकास के लिए दीर्घकालिक योजना पर जोर दिया। नागरिकों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझना और ठोस समाधान लागू करना, उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता और कार्यशैली के कारण ही पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए उपयुक्त उम्मीदवार माना है, ऐसी चर्चा राजनीतिक हलकों में है।
मायाताई इवनाते राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं। इस पद पर रहते हुए उन्होंने अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाया और नीतिगत स्तर पर उनका प्रभावी रूप से अनुसरण किया। आदिवासी समाज के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए उन्होंने पहल की। सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर उनकी स्पष्ट और दृढ़ भूमिका मानी जाती है।
नागपुर भाजपा में कई वर्षों से सक्रिय मायाताई इवनाते ने संगठनात्मक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शहर और क्षेत्रीय स्तर पर उन्होंने अनेक जिम्मेदारियां निभाईं। कार्यकर्ताओं से सतत संपर्क, पार्टी के प्रति निष्ठा और अनुशासित कार्यशैली के कारण उनकी छवि मजबूत बनी है।
राज्यसभा की उम्मीदवारी से नागपुर को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व का अवसर मिलने जा रहा है। स्थानीय निकायों का अनुभव, महापौर के रूप में कार्यकाल और राष्ट्रीय आयोग में भूमिका, इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। आगामी समय में वे संसद में विदर्भ और आदिवासी समाज के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाएंगी, ऐसी अपेक्षा व्यक्त की जा रही है।




