अकोला समाचार : महाराष्ट्र में वन्यप्राणियों का बढ़ता उपद्रव किसानों और ग्रामीण नागरिकों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। जंगली सूअर, हिरण, नीलगाय, बंदर जैसे जानवर बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, वहीं कुछ हिंसक प्राणी मानव बस्तियों में घुसकर हमले भी कर रहे हैं। सातपुड़ा पर्वत के पायथ्य पर बसे आदिवासी क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है।
रघुनाथ पाटील प्रणीत शेतकरी संघटना के विदर्भ अध्यक्ष लक्ष्मीकांत गजानन कौठकर ने पत्रकार वार्ता में बताया कि राज्य में प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये का कृषि नुकसान हो रहा है। वर्ष 2016-17 में अकोला जिले के 3258 किसानों की फसल वन्यप्राणियों से प्रभावित हुई थी, जिसके बदले मात्र 1.17 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया था, जो अत्यंत अपर्याप्त है।
संघटना ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत हिंसक जानवरों पर नियंत्रण के लिए स्थानीय स्तर पर अधिकार देने, तकनीक के माध्यम से निगरानी बढ़ाने तथा वन क्षेत्र के चारों ओर सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की है।
इस अवसर पर अफजल बरकत भास्कर (अकोला युवा आघाड़ी), मोहन खिरोडकर (अकोट युवा आघाड़ी), गोपाल निमकर्डे (तेल्हारा युवा आघाड़ी), किरण गुहे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।




