नागपुर समाचार : महाराष्ट्र में परिट धोबी समाज की लंबित एवं ज्वलंत मांगों को लेकर समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष बालाजी शिंदे के नेतृत्व में 08 दिसंबर 2025 से हिवाळी अधिवेशन की समाप्ति तक नागपुर के यशवंत स्टेडियम में साखळी धरना आंदोलन आयोजित किया जाएगा। समाज का कहना है कि कई वर्षों से शासन के समक्ष लोकतांत्रिक पद्धति से निवेदन किए जा रहे हैं, लेकिन समाधान न मिलने के कारण अब तीव्र आंदोलन का मार्ग अपनाना पड़ा है।
समाज ने मांग की है कि मराठा समाज को हैदराबाद गजट के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र दिए जा रहे हैं, उसी तर्ज पर 1960 से पूर्व के सी.पी. एंड बेरार दस्तावेजों के आधार पर महाराष्ट्र के धोबी समाज को ‘अनुयोजित जाति’ प्रमाणपत्र दिया जाए। साथ ही अनुसूचित जाति लाभों के लिए गठित डॉ. डी. एम. भांडे समिति की रिपोर्ट राज्य सरकार की सकारात्मक शिफारस के साथ केंद्र सरकार को भेजी जाए, ताकि समाज को लंबे समय से रोके गए अधिकार प्राप्त हो सकें।
मार्च 2024 के बजट अधिवेशन में वित्त मंत्री अजित पवार द्वारा घोषित “श्री संत गाडगेबाबा आर्थिक विकास महामंडळ” अभी तक कार्यान्वित नहीं हुआ है। समाज की मांग है कि इसे तुरंत स्थापित कर पर्याप्त निधि प्रदान की जाए।
ओबीसी वर्ग में हाल ही में बड़ी संख्या में मराठा–कुणबी प्रविष्टियों के कारण परिट धोबी समाज एवं पारंपरिक बारा बलुतेदार जातियां हाशिये पर जा रही हैं। समाज चाहता है कि इन्हें “विशेष मागासवर्ग” का स्वतंत्र दर्जा दिया जाए। साथ ही राष्ट्रसंत गाडगेबाबा को भारतरत्न घोषित करने हेतु महाराष्ट्र सरकार द्वारा केंद्र को तत्काल प्रस्ताव भेजा जाए।
केंद्र सरकार की सफाईकामगार सूची में देश के रजक, परिट, धोबी समाज शामिल हैं, इसलिए महाराष्ट्र में भी इस समाज को सफाईकामगार के रूप में विशेष सहयोग और योजनाओं का लाभ तुरंत उपलब्ध कराया जाए। तेलंगाना में हैदराबाद गजट के आधार पर परिट धोबी समाज को ओबीसी में विशेष दर्जा प्राप्त है, वही दर्जा महाराष्ट्र में भी लागू किया जाए, ऐसी प्रमुख मांग समाज ने अधिवेशन के दरम्यान उठाई है।
समाज का कहना है कि जब तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन सशक्त रूप में जारी रहेगा।




