नागपुर समाचार : महाराष्ट्र में ओबीसी आरक्षण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकार पर आरोप है कि मराठवाड़ा क्षेत्र में मराठा समाज के लोगों को ‘कुणबी’ प्रमाणपत्र देकर शॉर्टकट तरीके से ओबीसी प्रवर्ग में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के हाथों हाल ही में हुए प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
विरोधियों का कहना है कि यह कदम ओबीसी समाज के हक़ और अधिकारों पर सीधा आघात है। एक ओर सरकार कहती है कि केवल पुराने नोंदवही दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र दिए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर सवाल उठाया जा रहा है कि अगर पुराने रेकॉर्ड पर्याप्त थे, तो नया जीआर (सरकारी आदेश) जारी करने की ज़रूरत क्यों पड़ी। इससे पूरे मामले में गोलमाल की आशंका जताई जा रही है
विशेषकर मीडिया में सामने आई सूची में मुस्लिम और ब्राह्मण व्यक्तियों के नाम भी प्रमाणपत्र धारकों में शामिल पाए जाने से विवाद और गहराया है। आलोचकों का आरोप है कि सरकार ने जाति प्रमाणपत्र जैसे व्यक्तिगत और संवेदनशील विषय को सार्वजनिक वितरण समारोह का रूप देकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया है।
ओबीसी नेताओं ने मांग की है कि जब तक जीआर के खिलाफ न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक मराठवाड़ा क्षेत्र में कुणबी प्रमाणपत्रों का वितरण तुरंत रोका जाए। इस मुद्दे पर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की तैयारी चल रही है। उल्लेखनीय है कि 8 सितंबर को ही इस संदर्भ में प्रधानमंत्री, केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री और राष्ट्रीय ओबीसी आयोग के समक्ष भी शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है।




