

जामसांवली समाचार : पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के पावन तृतीय शनिवार के अवसर पर सुप्रसिद्ध चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर हनुमान लोक, जाम सांवली धाम में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही लाखों श्रद्धालु भगवान श्री जामसांवली हनुमान जी के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे और पूरे दिन धाम भक्तिमय वातावरण, जयकारों तथा आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान रहा।
1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए स्वयंभू प्रतिमा के दिव्य दर्शन
इस विशेष अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्वयंभू लेटी हुई मुद्रा वाली श्री हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा के दर्शन कर पूजा-अर्चना, कर्पूर आरती एवं मंगल कामनाएं कीं। भक्तों ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन के लिए प्रभु चरणों में प्रार्थना अर्पित की। सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिर परिसर एवं दर्शन मार्ग पर श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही बनी रही, जिससे पूरा धाम आस्था के महासागर में परिवर्तित हो गया।

प्रातःकालीन मंगल आरती से लेकर संध्या महाआरती तक भक्तों की भारी उपस्थिति देखने को मिली। शंखध्वनि, घंटों की गूंज और बजरंगबली के जयकारों के बीच पूरा धाम भक्ति रस में सराबोर रहा। संध्या के समय महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ आरती में सहभागिता की, जिससे वातावरण और भी अधिक दिव्य एवं अलौकिक बन गया।
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए मंदिर संस्थान द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। संस्थान के अध्यक्ष श्री गोपाल शर्मा ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के विशेष धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन ने दर्शन, पेयजल, यातायात एवं पार्किंग सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रखा, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी को देखते हुए मंदिर परिसर एवं दर्शन मार्ग पर शीतल पेयजल की विशेष व्यवस्था की गई थी। साथ ही, श्रद्धालुओं के सुगम एवं सुरक्षित दर्शन हेतु प्रशासन, पुलिस बल तथा सेवादारों के सहयोग से व्यवस्थाओं का सफल संचालन किया गया।
संस्थान प्रबंधन ने इस अवसर पर पधारे सभी श्रद्धालुओं, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था और सहयोग से पुरुषोत्तम मास का यह विशेष शनिवार भक्ति, सेवा और श्रद्धा का एक यादगार पर्व बन गया।





