नागपुर समाचार : स्थानीय विधान परिषद चुनाव में लागू की गई आचार संहिता का आम जनता से प्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है। नागपुर जिले में लगभग ८०० मतदाता हैं और ये सामान्य मतदाता नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। ऐसे में पूरे जिले के विकास कार्यों को रोकना या बाधित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। उक्त बात पूर्व नागपुर के विधायक कृष्णा खोपडे ने कही। उन्होंने चुनाव आयोग से इस संबंध में पुनर्विचार करने की मांग की।
खोपड़े ने बताया वर्तमान में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है तथा ६ जून से वर्षा ऋतु प्रारंभ होने वाली है। ऐसे समय में कई आवश्यक विकास कार्य तात्कालिक रूप से किए जाना जरूरी होते हैं। अनेक विकास कार्यों की निविदाएं एवं कोटेशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कई कार्य वर्क ऑर्डर जारी होने के अंतिम चरण में हैं। इन विकास कार्यों का चुनाव प्रक्रिया या मतदाताओं पर किसी प्रकार का प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि इस चुनाव में मतदान केवल निर्वाचित नगरसेवक एवं जनप्रतिनिधि ही करते हैं। इस कारण इस चुनाव का व्यापक आचार संहिता से दूर-दूर तक कोई संबंध दिखाई नहीं देता। केवल सीमित मतदाताओं वाले इस चुनाव के कारण संपूर्ण जिले के विकास कार्यों को २५ जून तक रोककर रखना नागरिक हितों के विरुद्ध है।
इससे आम जनता को अनावश्यक परेशानी और विकास कार्यों में देरी का सामना करना पड़ेगा। अतः चुनाव आयोग को इस विषय में गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए तथा जनहित को ध्यान में रखते हुए आचार संहिता में आवश्यक शिथिलता प्रदान करनी चाहिए, ताकि नागरिकों को विकास कार्यों से वंचित न रहना पड़े।




