नागपूर समाचार : कामठी नगर परिषद चुनाव के बाद शुरू हुआ राजनीतिक घमासान अब और तीखा हो गया है। बरिएमं प्रमुख और पूर्व राज्य मंत्री सुलेखा कुंभारे ने प्रेस-परिषद के दौरान राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके राजनीतिक जीवन की अब तक की जीतें बोगस वोटों और मतों के ध्रुवीकरण के सहारे ही मिली हैं। उनके अनुसार, कामठी विधानसभा में दलित व मुस्लिम समुदाय के उम्मीदवार खड़े करवाकर मतों को बांटने की रणनीति बनाई जाती रही है।
कुंभारे ने आरोप लगाया कि हालिया नगर परिषद चुनाव में व्यापक पैमाने पर फर्जी मतदाताओं का उपयोग किया गया, जिसे उनकी पार्टी ने बेनकाब किया है। उन्होंने कहा कि नैतिकता के आधार पर बावनकुळे को तुरंत मंत्री पद से हट जाना चाहिए।
बरिएमं–भाजपा वाद-विवाद चरम पर
कुंभारे का बयान भाजपा और बरिएमं के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप को नई दिशा देता है। इससे एक दिन पहले भाजपा उम्मीदवार अजय अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि उन्हें बदनाम करने के लिए बरिएमं की ओर से फर्जी वोटरों को पकड़वाने की साजिश रची गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कुंभारे ने कहा कि भाजपा ने सीट बंटवारे में विश्वासघात किया, इसलिए उनकी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे। उन्होंने स्पष्ट कहा, “अब भाजपा के साथ गठबंधन की कल्पना भी नहीं होगी।”
व्यापारियों पर दबाव और फार्म हाउस विवाद
कुंभारे ने आगे आरोप लगाया कि हार की आशंका के चलते भाजपा ने दबाव तंत्र का सहारा लिया। व्यापारियों और संस्थाओं से जुड़े लोगों को बुलाकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में काम करने का दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि फार्म हाउस से वोटिंग की स्याही मिटाने वाला केमिकल, पैसे और कई लोगों के आधार कार्ड बरामद हुए। ये सभी साक्ष्य पुलिस और चुनाव आयोग को सौंपे गए हैं।
मतगणना आगे बढ़ाने का आरोप
कुंभारे ने यह भी दावा किया कि भाजपा ने आयोग से मिलीभगत कर तीन नगरसेवक क्षेत्रों का चुनाव स्थगित कराया और मतगणना को आगे धकेलवाया। उन्होंने कहा, “चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए हर स्तर पर खेल किया गया।”




