नागपुर समाचार : आज दुनिया को संघर्ष की नहीं बल्कि सौहार्द की आवश्यकता है. दुनिया में जंगल का नियम मानने वाले स्वार्थ व वर्चस्व के लिए युद्ध कर रहे हैं. लड़खड़ाती दुनिया को धर्म का आधार देकर उसमें संतुलन बहाल करना भारत की जिम्मेदारी है. भारत के लोग मानवता के नियम का पालन करते हैं. लड़खड़ाती दुनिया को धर्म की बुनियाद देकर उसमें संतुलन बहाल करना हमारा काम है. यह कहना है संघ सरसंघचालक मोहन भागवत का. वे जूना सुभेदार लेआउट शारदा चौक में विश्व हिंदू परिषद विदर्भ प्रांत के प्रस्तावित भवन के शिलान्यास समारोह में बोल रहे थे.
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि भारत ही है जिसके पास समस्या को सुलझाने की ताकत है क्योंकि भारत सद्भाव में यकीन करता है. आज पूरी दुनिया से आवाज उठ रही है कि भारत ही ईरान-इजराइल युद्ध को खत्म करने में अहम भूमिका निभा सकता है. उन्होंने कहा कि यह युद्ध सिर्फ और सिर्फ वर्चस्व की लड़ाई है. दुनिया विनाश के कगार पर है और विश्व को जोड़ने की ताकत हमारे पास है.
संपूर्ण समाज की एकजुटता
भागवत ने कहा कि लक्ष्य को हासिल करने के लिए अनुशासन जरूरी है और इसके लिए अभ्यास व परिश्रम करनी पड़ती है. भारतीय संस्कृति में यही शक्ति है जो सभी को जोड़ने व जोड़कर रखने का काम करती है. जोड़ने की शक्ति केवल भारत में है लेकिन इसके लिए संपूर्ण समाज की एकजुटता जरूरी है. उन्होंने कहा कि सच्चे सुख की कल्पना तभी की जा सकती है. जब तक सभी सुखी नहीं हो जाते. उन्होंने कहा कि विहिप का यह प्रस्तावित भवन धर्म, कर्म और मर्म का केंद्र बनेगा. संतों के आगमन का आश्रम बनेगा और परिषद के कामकाज के लिए कार्यालय की भूमिका निभाएगा. जब राष्ट्र पर संकट आएगा उस समय अखाड़ा बन जाएगा. उन्होंने कहा कि स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही प्राप्त की जा सकती है.
आज भी जबरन धर्म परिवर्तन और ऊंच-नीच के विचार
भागवत ने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और ऊंच-नीच के विचार अब भी मौजूद हैं. उन्होंने संघर्ष से सौहार्द और सहयोग की ओर बढ़ने की अपील करते हुआ कहा कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है. भागवत ने आचरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि यह लोगों के व्यवहार में भी दिखना चाहिए. जारी संघर्षों के बीच दुनिया भर से आवाजें उठ रही हैं कि केवल भारत ही युद्धों को समाप्त कर सकता है क्योंकि यह देश का स्वभाव है.




